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नगर किसे कहते हैं?

नगर का अर्थ

नगर से अभिप्राय उस स्थान से है जहाँ जनसंख्या की अधिकता , श्रम विभाजन , विशेषीकरण , औपचारिक और द्वैतीयक सम्बन्ध , नियन्त्रण के औपचारिक साधनों की प्रधानता तथा लोगों का गैर - कृषि कार्यों में लगे होना है । ' नगर ' की परिभाषा देना अत्यन्त दुष्कर कार्य है । इसी आशय को प्रकट करते हुए बर्गल का कथन है कि , “ प्रत्येक व्यक्ति यह जानता प्रतीत होता है कि नगर क्या है , किन्तु किसी ने इसकी

सन्तोषजनक परिभाषा नहीं दी है । ” वास्तव में बर्गल का कथन यह सत्य ही है क्योंकि कोई भी विचारक यह निश्चित रूप से नहीं बता सका है कि कहाँ से नगर शुरू होता है और कहाँ पर समाप्त ? फिर भी अनेक विद्वानों ने ' नगर ' की परिभाषा करने का प्रयास किया है । 

नगर की परिभाषा

लुइस वर्थ के अनुसार , " समाजशास्त्रीय दृष्टिकोण से एक नगर की परिभाषा सामाजिक भिन्नता वाले व्यक्तियों के बड़े , घने बसे हुए एवं स्थायी निवास के रूप में की जा सकती है । " है 

थियोडोरसन तथा थियोडोरसन के अनुसार , “ नगरीय समुदाय एक ऐसा समुदाय जिसमें उच्च जनसंख्या घनत्व , गैर - कृषि व्यवसायों की प्रमुखता , जटिल श्रम विभाजन से उत्पन्न उच्च श्रेणी का

विशेषीकरण और स्थानीय सरकार की औपचारिक व्यवस्था पाई जाती है । नगरीय समुदायों की विशेषता - जनसंख्या की विभिन्नता , अवैयक्तिक एवं द्वैतीयक सम्बन्धों का प्रचलन । " 

प्रो . विलकाक्स के अनुसार , “ नगरों के अन्तर्गत उन समस्त क्षेत्रों को लिया जा सकता है जिनमें जनसंख्या का घनत्व प्रति वर्गमील 1,000 से अधिक हो और जहाँ वास्तव में कोई कृषि नहीं होती हो । ” इसी प्रकार बर्गल ने भी नगर को परिभाषित करते हुए लिखा है , " इस प्रकार हम उस बस्ती को नगर कहेंगे , जहाँ के अधिकांश निवासी कृषि कार्यों के अतिरिक्त उद्योगों में व्यस्त हों । "


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